छोटा से कमरा हो और बाहर बम धमाकों के चलते हर वक्त जान आफत में हो तो पहलवानी के बारे में सोचना समझदारी नहीं माना जाएगा, लेकिन अफगानी पहलवानों को रोजाना ऐसी परिस्थियों से दो-चार होना पड़ता है।
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